सुणीराम


बा घणी दुख पावै ही। अस्पताळ री पैड़्या मांय बैठे सुभास रो इज जीव कीं तळसूं मळसूं करै हो। टेम जेसो`रो निकळज्या तो बापड़ी दुख को पावै नीं, सुभास सोचै।
मांय सूं नरस आय` कैयगी कै उण नै डागदर बुलावै। बो अणमण्यो सो डागदर कनै पूग्यो।
''किस्तूरी कीं ठीक है, घणी जेज कोनी लागै।`` डागदर कैय` भोळावण दी अर दवायां री अेक परची उणकानी करदी।
सुभास भाज` मेडीकल स्टोर सूं दवायां लियायो अर दवायां री थैली डागदर नैं पकड़ा दी। डागदर थैली मांय सूंदवायां काढ` कीं उलटी-पलटी अर उणानैं ले` किस्तूरी कानी चाल्यो।
सुभास ओजूं पैड़्या माथै। मांय सूं कीं बुसबुसिया सुणै। अर सुभास गळगळो होग्यो।
नरस ओजूं आयी। सुभास फटदांईं खड़्यो होग्यो। इब के कमी रैयग्यी ?
''बधाई हो, थे बाप बण्या हो। छोरो हुयो है।`` नरस कैयो तो सुभास रै खुसी रो नेप को रैयो नीं। उण नरस कानींओजूं देख्यो। बण हाथ मांड राख्यो हो। सुभास नरस नैं सौ रो नोट दियो अर किस्तूरी कानी भाज्यो।
''म्हैं मांय जा सकूं ?`` डागदर बारणै आगै खड़्यो हो।
''क्यूं नीं ?`` डागदर थोड़ो अळगो हुग्यो अर सुभास आपरी बंसबेल कनै।
''अबै तो ठीक होगी ?`` बीं किस्तूरी नैं बूझ्यो अर निजर नान्हैं सै फोवै कानीं।
''राम सुणी।`` किस्तूरी जीवसो`रो दिखायो।
''नीं किस्तूरी, सुणीराम। इज नाम राखस्यां।`` सुभास रो मोद बढ़तो जावै हो। किस्तूरी मुळक` रैयग्यी।
दूजै दिन दोवूं घरै आग्या, घणी सारी खुसियां ले`र। सुभास सगळै दिन भाज्यो फिरै जाणै पांख आगी हुवै।
''भाईड़ा बाप बणग्यो, बूढ़ो होग्यो। पैली तो टाबरां मांय इज बजतो।`` बास-गुवाड़ रा सुभास साथै ठिसकोळीकरै।
सुभास नैं इज घणूं बदळाव लागै आपरै मांय।
बो रोजीनै सोचै, मालासी रा जीप वाळा किता` ले लै। कीं दूजी सवारी इज सागै बिठा सकै। म्हें तो दो इज हां।सुणीयै रो झड़ूलो इज उतारणूं है।
बो घणी आगै री सोचै। छोरै रो ब्याव हणमानगढ़ कानी कर स्यूं। कीं काळ दुकाळ मांय रिस्तेदार काम सकै।पाणी रो सींचावू इलाको है। कणक-काणक अर तुड़ी-ताड़ी रो तो सा`रो लगा इज दै। मटो छोटूड़ो परलीकै केब्याइज्यो न्ह्याल होर्यो है। लैरला काळ किंया काढ्या उणनैं ठा इज कोनी लाग्यो। तुड़ी कणक रो रिस्तेदारां गेड़बांध दियो हो। लोगां नैं पीसा दियां इज हणमानगढ़ टिपणूं पड़ै हो।
कदै इज बो सोचै `रै ना रै रिस्तेदारां सूं लेयर खावणों किसी भलमाणसी है। रिस्तेदार तो अेडै-मेडै रा हुवै है।रिस्तेदार चोखा हुवै तो गांव गुवाड़ी मांय कीं इज्जत बधज्या। रिस्तेदार कीं डोळ रा सावळ हुवै तो दूजां री बोलीको पाटै नीं। मेघो मटो के हो। बाड़ै री लड़ाई हुवी जद उण रा रिस्तेदार लट्ठ ले-ले` आग्या। अेक कन्नै तोराइफल इज न्यारी ही। अर उण सगळां नैं आया देख छगनों रींक करणैं लागग्यो। कै तो बो घुरका करै हो अर कैदबाबद सळटीड़ो कर लियो। रिस्तेदार तो बिस्या हुवणा चाहिजै। बो तो छोरै नैं राजगढ़ कानीं ब्यासी।
पण अै बातां बतावै कीनैं ? दूजा तो उण माथै हंसै। बो तो अजै ताणी संकावतो मालासी रो जीप भाड़ो इज कोबूझ सक्यो नीं।
छोरो अरडाट चढ़ग्यो। के हुयो ? के हुयो ? सुभास बा` बा` फिरै। किस्तूरी घणो इज चूंचियां लगावै पण पारनीं पड़ै। अरड़ावणूं बधतो जावै। मुंह मांय झागला सा न्यारा आवै।
गोळी दवाई दे` सुभास अजै इज तो नाकै हुयो हो। इती बार मांय के होग्यो?
सुभास नैं कीं दूजी बात लागी। बो भाज` गांव रा बैदजी कन्नै गयो। बैदजी बेगड़ी चक्यां इज आया। पण दोवूंपूग्या जद ताणी घरां कीं को लाद्यो नीं।
सुभास आकळ-बाकळ हुग्यो। बैदजी छोरै नैं हलावै। छाती मांथै आपरा पुरजा मेल` सांस सुणै। पण हुवै जदनीं।
पैली टाबर अरडावै हो अर अब अरड़ावणूं दूजा सरू कर दियो। बास भेळो होग्यो। मटी माड़ी हुयी। सगळाअफसोस करै।
पण सुभास। रैयग्यो हाथ मसळ`र।
बगत रै परवाणै सोकीं भूलीज्या। घणां दिन हुग्या।
अेक दिन बिसनियो भाजतो सो आयो सुभास कन्नै। सुभास बिसनियै कानीं देख्यो।
''भिया, टाबर नीं हो रैयो है, मूळकी घणी दुख पावै है। जीपड़ी घर कानी घाल` आयो हूं। बैदजी कैवै हा, सै`अस्पताळ ले ज्यावणी पड़सी। थूं म्हारै सागै चाल। जाणीजाण है।`` बिसनियै रो सांस को नावड़ै हो नीं।
सुभास खड़्यो-खड्यो इज कुड़तियो-साफलियो लियो अर बिसनियै साथै चाल पड़्यो।
बो इज अस्पताळ अर बो इज डागदर, नरस। सुभास नैं कीं खावण री सी जगां लागै।
''म्हैं तो बारै रा कीं काम है वै साम्भ लेस्यूं। जिंया दवायी-पूळी ल्यावणीं हुयी। मांय कन्नै थूं रैयी। म्हैं बारैंखड़्यो हूं।`` बिसनियै नैं कैय` बो अस्पताळ सूं बारै खुलै मांय आग्यो।
थोड़ी ताळ पछै बिसनियो दवायां री परची लेय` आयो। सुभास परची ले ली अर मेडिकल स्टोर कानी चालपड़्यो। दवाई ले` पाछो आयो तो डागदरां गेट बंद कर राख्यो हो। बिसनियो गेट आगै अेकल इज खड़्यो हो।
बो इज बठै खड़्यो होग्यो। बेलो के करै? हाथ दवायां नैं टटोळण लागग्यो। जाणै उथण-पुथळ` लिखेड़ा नामां नैंसैंन्धो करतो हुवै।
नरस थोड़ो`सोक गेट खोल्यो अर हाथ बारणै काढ्यो। सुभास समझग्यो अर दवायां नरस रै हाथ मांय पकड़ादी।
बै इज बुसबुसिया। भगवान लुगाई नैं इती पीड़ क्यूं दी। दोवूं सोचै।
घणी जेज को लागी नीं। डागदर बारैं आयो। अेक परची सी माथै बिसनियै रा दस्तखत करवाया अर पाछोमांय बड़ग्यो। थोड़ी ताळ पछै डागदर अर नरस दोवूं मुंह लटकायां पाछा आग्या।
सुभास अर बिसनियो दोवूं धोळा हुग्या। पण करै कांई ? अस्पताळ मांय तो रोय इज को सकै नीं। मांयरा आंसूमांय इज पीग्या।
सुभास बिसनियै रै मोडै उपरां हाथ मेल्यो अर नाड़ हला` ऊपर आसमान कानी देख्यो। बिसनियै आपरा आंसूपूंछ्या अर मांय सूं मूळकी नै बारै ल्यावण उठग्यो।
नरस इज ` कीं सा`रो लगायो।
सुभास कीं गाभा-गूभा हा बै साम्या तो नरस इज बंचेड़ी दवायां री थैली पकड़ा दी।
जीपड़ती मांय मूळकी नैं बठायी पण जीपड़ती मांय डलेवर कोनी। इन्नै-बिन्नै होटल माथै बैठ्यो होसी।
सुभास ढूंढ़ण लागग्यो। पण दिखै नीं। बो जीप कन्नै ` खड़्यो होग्यो, आसी तो जीप कन्नै इज।
सुभास रा बेलै खड़्यै रा हाथ ओजूं दवायां री थैली मांय चालण लागग्या। चाणचकै इज उणरी निजर दवायां रैआंकां माथै गई। अै दवायां किणरी आगी। दवायां सैंधी नीं लागी। बापड़ै किणी री होसी। बदळी होगी होसी।डलेवर आवै इती बार मांय पाछी दे आवां।
बो सागी जगां पूग्यो। गेट बंद हो। कीं दुखियारी रै ओजूं लागर्यो हो डागदर। सुभास गेट कन्नै खड़्यो होग्यो।दूूजी कानी सूं अेक डागदर आयो। ''किंया खड़यो हो अठै? बारै चालो। जरूरत होसी तो बुला लेसी थानैडागदर?`` बण डागदर रोब झाड़यो।
बडा डागदर होस्सी। आपणै के आपां इन्नैं बूझल्या। सुभास हिम्मत करी अर डागदर नैं दवायां दिखादी।
''ल्यावो बा परची है के?`` डागदर बूझी।
सुभास खुंजा मांय सूं झटदांईं दवायां री परची काढ़ी। डागदर देखी। अर नाड़ हलायी।
सुभास बूझ्यो - ''के हुयो डागदर सा`?``
''अै साळा जल्लाद। दवायां बदळ` सस्ती अर नकली दवायां लगा` कितां` रो सित्यानास करसी।`` दवायां पाछी सुभास नैं पकड़ावंतो थकां डागदर आगी नैं उठग्यो।
सुभास सगळी समझग्यो। कीं बाकी को रैयो नीं सुभास मांय।
सुभास गेट रै धक्को दियो अर झट दांई मांय बड़ग्यो। डागदर अर नरस दोवूं हा। अेक लुगाई बैड माथै। सुभासइन्नै-बिन्नै देख्यो। ऑक्सीजन रो सिलेंडर निगै आयो। सुभास फट दांई उणनैं चक्यो अर डागदर री खोपड़ीखोल दी।
भाज` सुभास जीपड़ी मांय बैठग्यो। पण जावण कुण दै हो?