हामळ


मिंटू साइबर केफै सूं बारै आयो अर निजर सड़क माथै गेरी। साधनां रो कीड़ीनगरै री ज्यूं तांतो बंध रैयो हो।दोपहिया अर च्यारपहिया आपस मांय होडम-होड मचा राखी। बो कैवै म्हैं आगै जावूं अर बै कैवै म्हे आगे जावां।
दोपारां रा दोय बजग्या। बण घड़ी नैं ओजूं देखी। दोय बजग्या इण मांय कठै इज मीन मेख कोनी। मिंटू नैंअफसोस हुयो। बो इंटरनेट सूं इस्सो कनेक्ट हुयो` टेम रो ठा इज कोनी पड़्यो। मीनू अडीक-आडीक` गयीहुगी। सवा बा`रा बज्यां रो मिलण रो कौल कर्यो हो। बापड़ी पब्लिक पार्क मांय घणी आखती हुयी होसी। झुंझळसी हुयी आप माथै मिंटू नैं। इस्सी बात इज भूलग्यो।
पण मीनू म्हनैं मोबाइल माथै फोन तो कर सकै ही। 'अठै खड़ी उडीक करूं`, इतो इज तो उण नैं कैवणूं पड़तो।पण नीं कर्यो। के जोर आवै हो ? मोबाइल तो उण कन्नै इज हो। अै नखरा जे नीं हुवंता तो बींनैं मीनू कुणकेंवतो। मिंटू झाळ खावै।
पण इब, म्हैं बात करस्यूं तो खा लेसी। ओळमैं उपरां ओळमां देसी। मिंटू री आंगळ्यां मोबाइल रै बटणां माथैइज थमगी। अेकर ओजूं सोच्यो। चालो तड़कै देखस्या मनाय लेस्या। अर मोबाइल खुंजा मांय घाल लियो।मोटर साइकिल रै किक लगा` आपरी मोटर साईकिल स्टार्ट करी अर सड़क रै कीड़ी नगरै मांय भेळो होग्यो।
''मिंटिया, थारै दादै नैं रोटी पकड़ा` आव।`` घरां बड़तां इज मां रो हुकम हुयो। मिंटू बारलै कमरै कानी देख्योदादो पसवाड़ो लियां सूत्यो।
''थूं इज पकड़ा आव।`` मिंटू बेपरवाह सो` होय` कैयो।
''बेटा, `ला-आला काढ़णां पड़सी। अर पछै थारो दादो म्हारै सूं जीव री नीं कैय सकै। के कमती है के बती है।थू जीमा आव बेटा।`` मिंटू री मां मिंटू नै समझायो।
''मां, सै` मांय आग्या। बरसां होग्या। दादो भी सै` रा सगळा कूणां ढूकै। पछै इज `ला अर नीं बोलण रोसंको ? समझ मांय को आवै नीं थारी लपचेड़......`` मिंटू झाळ खांवतो बोल्यो।
''बेटा, किणी री आतमा नैं दुख नीं देवणू चाहिजै। जद थारै दादै रै जीव मांय है कै बो `लो कढ़ासी अर बोलणरो संको राखसी तो आपां बांरो क्यूं जी दो`रो करां। आतमा अर मन रो सगळां रो ध्यान राखणूं इज तोसमझदारी हुवै ....`` मिंटू नै मां कैयो।
''अछ्या, थूं आतमा अर मन रो सगळां रो ख्यांत राखै है के..?`` मिंटू अरथावू दीठ सूं मां कानी देख्यो।
''राखणूं चाहीजै बेटा।``
''पछै म्हनैं रोवणूं-रोवंता घणां दिन होग्या कै म्है ब्याव करस्यूं तो मीनू रै साथै। म्हारी आतमा बठै, म्हारो मनबठै। थारी ईं बात माथै हामळ क्यूं नीं हुवै...`` निरजळो होय` मिंटू कैंवंतो गयो।
मिंटू री बात मिंटू रा पापा नीं सुण लै नीं तो हंच मंड ज्यासी। पंदरा दिन होग्या। रोजीना हंच मंडता। मिंटू रोजगोमीनू रो जिकर कर दै अर उण रा पापा रोजीना विरोध कर` रोळा-बैधा करै।
आज ओजूं खेलो नीं मंडज्या सोच` मींटू री मां बोल बाली` थाळी ले` बारलै कमरै कानी दादै नैं रोटीजीमावण नै चाल पड़ी। मिंटू फद-फद करतो पैड़्यां चढ़ग्यो। उपरलो कमरो बीं रो स्टडी रूम।
''बेटा, देबू नैं म्हारै कन्नै घाली।`` मिंटू रै दादै रोट्यां री थाळी पकड़तै थकां मिंटू री मां नैं हुक्म दियो।
''थानै दादो बुलावै।`` मिंटू रै पापा कन्नै जा` उण हुकम सुणा दियो।
''कांई बात हुयी?`` देबू बात री पैली इज ठा लेवणी चायी।
'' के ठा? जा` बूझल्यो।``
''कांई कैवै हा बापू?`` देबू आपरै बापू कन्नै जा` बूझ्यो।
''बैठ बेटा, म्हैं कीं बतळावण करणीं चावूं....``
देबू बैठग्यो।
''बेटा म्हैं थन्ने कैयो जद थूं म्हारी बात मान` मिंटू रो ब्याव मीनू साथै करण सूं मिंटू नै नटग्यो हो।``
''पछै के हुयो बापू। थे इज तो घरधणी हो।``
''बेटा, थूं अर बीनणी म्हारो आदर करो इण पाण म्हैं अपणै आपनैं इंर् जमारै मांय बड़भागी समझूं। पण बेटालारलै कीं दिनां सूं म्हैं देखूं घरां कळह रैवै। आज इज म्हैं मिंटू अर उणरी मां री बात सुणी। म्हैं आजरै टाबरां रीसोच मांय सामळ हुवणै मांय इज भलो समझणै री सोची है। म्हैं चावूं कै थूं इब मिंटू नैं मीनू रै साथै ब्याव करणरी हामळ भर दे।``
''कांई केवो बापू...?``
''हां बेटा।``
देबू आपरै बापू कानी देख्यो। बापू कदै इज रोट्यां री थाळी कानी तो कदे इज उण रै मुंडै कानी देखै हा।
देबू कीं नीं बोल सक्यो। बोल-बालो मांयनै चाल पड़्यो। अबै देबू रै बाप री निजर देबू री पीठ माथै टिकगी। बठैपब्लिक पार्क रा चितराम सा मंडता दिख्या। मीनू किणी दूजै रै साथै होंठां सूं होंठ.......
नीं उणरी निजर धोखो नीं खायो हो। बा सागी मीनू इज ही जकी अेक दिन मिंटू रै साथै घरां इज आयी ही।
बण रोट्यां री थाळी अेक कानी सरकादी, ब्याव रै खातर सही नट्यो हो कै गळत इंर् दोघाचिंती मांय।
अर दूजै दिन मिंटू साइबर केफै मांय मीनूं री घालेड़ी ईमेल मांय उणरा लिख्योड़ा अंगरेजी रा तीन सबदा मांयउळझै हो। साच कै झूठ।