सत


रुघो हळाई बिचाळै इज छोड़` घरां पूठो आग्यो। दोपारां इज घरां आयेड़ा देख घरधिराणी मनकोरी रुघै रै बा`बा` फिरै। घणूं बूझै पण कीं बतावै कोनी, पूठो किंयां आयो। ईं बिजाई रै बगत मांय हळ छोड़` पाछो बिनांकोई तगड़ै काम तो आवै कोनी।
चिणा री बिजाई अर आल इज कमती। रोजीनै आल सूकै। हाळी रातूं बावणै मांय लाग्या रैवै। जे बीज आल मांयपड़ज्या तो उगज्या। के ठा भगवान् पछै बिरखा कर्दे अर नाको लागज्या। अर इस्सै बगत मांय रुघो हळ बिचाळैछोड़` पाछो आग्यो?
''कीं तो बतावो, कांई हुयो ? पाछा किंया आग्या ? किणीं कीं कैय दियो के ?`` मनकोरी बूझ्यो।
'' .....................``
'' के किणी रै साथै लड़-झगड़ लिया ?``
'' .................... ``
''बोल्या किंया कोनी ? अड़ी री टेम अर थे हळ छोड` पाछा आग्या। कीं टाबरां खातर दाणां हुज्यांवता।`` मनकोरी आगली चिन्त्या इज रुघै साम्ही राखी।
''.................. ``
'' देवता म्हारा, म्हारै सूं कठै इज कोई गळती नीं हुगी हुवै ?`` मनकोरी दोख री भागी बणण रै डर सूं बूझ्यो।
''नीं, बस ईंयाज ही थोड़ो पेट दूखण लागग्यो हो।`` रुघै रै मनकोरी री गळती री बात लागी।
''तो कोई बात नीं। हाथ-मुंह धोल्यो। म्हैं मोई बणा` देद्यंू। पीड़ थमज्यासी। बिजाई का` हुज्यासी।`` मनकोरी कीं संतोख दे` चूल्है कानी मोई बणावण सारू चाली।
रुघो मोई चाबग्यो। अजवाण, काळी मिरच अर चीणीं, घी मांय कळकळायेड़ी। जीभ नैं इज सुवाद लागै। मोईखा` रुघो माचै माथै आडो हुग्यो। थकेड़ै हाडां मांय नींद कद आगी ठा इज कोनी पड़्यो।
आथण बगत हुग्यो। मनकोरी रै जगावण सूं रुघो जाग्यो। दिन छिपतो सो हो। आंख्यां खोलतै इज रुघै नैं दिनूंगैरो सो उजास लाग्यो। पण इतो बेगो दिनूंगो नीं होय सकै। रुघै सोच्यो।
''आथण हुग्यो। न्हाय-धो`ल्यो। रामदेव जी रो दीयो करद्यो। बाबो रामसो पीर सगळी पीड़ ठीक करसी। थे न्हावोइतै मांय म्हैं कीं दूजा काम करल्यूं। पछै रोटी पोवसूं।`` मनकोरी रुघै रो कीं जीसो`रो देख` काम मांयलागगी।
''बाबा ! थारो पेट मटो तकड़ो दुख्यो के ?`` नैनको बेटो भूपड़ो गुवाड़ मांय सूं खेल` आग्यो हो।
''ना बेटा, बस ईंया इज थोड़ी सी दूख ही, ठीक होगी।`` रुघै कैयो अर गोडां रै हाथ दे` खड़्यो होग्यो।
भूपड़ो खड़्यो होवंता इज रुघै रै लमूटग्यो। रुघै लाड कर` भूपड़ै नैं गोदी चकलियो।
''`रै लधीड़, थन्नै गोदी चढ्यां बिना सरै कोनी कै ? अेक तो थारै बाबै रो पेट दुखै अर अेक थनै गोदीभावै।`` मनकोरी दूर सूं इज भूपड़ै नैं ललकार्यो तो बो ईं नासमझी रै खातर सिर कुचरण लागग्यो अर नीचैउतरण री तामस करै।
''ना बेटा, थारी मां ईंयाज कैवै। पेट तो पैली दुखै हो, इब तो अेकदम सावळ हूं। अर थूं तो म्हारो दीयो है। थूं इजसैचनण करसी ईं घर नैं.....`` रुघै लाडसूं भूपड़ै नैं बुचकार्यो अर उण नैं पाछो सावळ गोदी ले लियो।
दीयो, `रै दीयो करणूं हो रामसै पीर रो। दीयो सबद चेतै आयो। रुघो फटाफट तातै पाणी री बाल्टी भरी अरपाटड़ो ढाळ` न्हावण बैठ्ग्यो। भूपड़ो इज पाटड़ै माथै बैठ्यो। न्हावण नैं।
रुघो भूपड़ै नैं न्हुवावण लागग्यो। देख` मनकोरी अेक तातै पाणी री बाल्टी कन्नै ओर मेलगी।
तातै पाणी सूं न्हायां जी मांय कीं जक पड़ी। रगां रो खून कीं गरमायी सूं बेगो चालण लागग्यो। रुघै मायं कींचंचळाटी आयी अर दीयो-धूपियो ले` थान आगै।
''जै रामसा पीर...... अबै तो आवो।`` रुघो धूपियै माथै घी होमैं पण लौ नीं आवै।
लौ नीं आवंती देख` मनकोरी इज थान आगै आगी अर हाथ जोड़` खड़ी हुगी।
धूपियै माथै रुघै ओजूं घी होम्यो। पण.....
'ल्यावो म्हैं लौ लेवूं.....`` मनकोरी घी री घिलोड़ी साम्ही। रुघो आंख्यां मीच` हाथ जोड़ खड़्यो होग्यो।
''जै राम सा पीर री......`` मनकोरी घी होमंतां जोर सूं बोली। लौ रो भभको पाट्यो।
''बाबा, लौ आगी।`` भूपड़ै रुघै नैं आंखां मीच्यां खड़्यो देख` कैयो।
''हं % % % ......`` रुघै री चाणचकै इज आंख्यां खुली। लौ कानी निजर पड़ी अर खुड़को होयो, धै ....
''चक्कर आग्यो लाग्यो भूपड़ा थारै बाबै नैं। पाणी रो लोटो झला अर भाज` थारै परमूं काकै नैं बुला`ल्याव।`` अनकोरी रुघै नैं सांमता थकां बोली।
परमूं रो घर कीं दूर। जात-परिवार मांय बो रुघै रो भाई लागै। भूपड़ै परमूं रै घर कानी तड़ी दी।
मनकोरी पाणी रा छांटा दे` रुघै नैं चेतो करावै पण पार नीं पड़ी।
'के होग्यो`, 'के होग्यो` रो हाको माचग्यो। परमूं अर गांव रा कीं बूढ़ा-बडेरा भाज्या आया।
मनकोरी रुघै नैं छोड` `लो कर` नाकै होगी। बूढ़ा-बडेरां रुघै नैं साम्यो अर माची माथै सुवायो। नाड़ी देखी।
अेक जणो इस्सारै सूं भाज` जीपड़ती ल्यायो अर रुघै नैं सै` रै अस्पताळ ले ज्यांवण री तेवड़ी।
मनकोरी इज भूपड़ै नैं ले` जीपड़ती मांय सागै बैठग्यी।
अस्पताळ मांय घणी बार पछै अधखलो सो होस आयो रुघै नैं। बोलण खातर होंठ खोलै पण बोली नीं पाटै। अरकई बर कोसिस करतो-करतो रुघो ओजूं बेहोस हुुग्यो।
दूजै दिन होस कीं बावड़्यो। बा इज कोसिस। होठ पळपळावै पण बोल नीं सकै।
''बोलो, ठीक हो के....... म्हैं मनकोरी...`` मनकोरी रुघै नैं बोलावण री कोसिस करै।
रुघो चेतो कर्यो। मनकोरी कानी मीट जोड़ी..... आख्यां मांय आंसूं आग्या रुघै रै।
''नां मनकोरी, पुरखो साचो मिनख, झूठ नीं बोल सकै। अर थूं इज इस्सी कोनी.... पछै परमूं तो म्हारो.... बोइज इस्सो नीं कर सकै.....`` रुघै रा बोल पाट्या।
''कांई कैवो.....`` मनकोरी चिमकी।
'.......% % %.......` रुघै अेक निस्कारो न्हाख्यो अर पाछो गतागम। सदीव रै खातर।
मनकोरी कूकै। सत किंया परगटै। सतीत्व किंया दिखावै। लगावणियां- बुझावणियां रो तो के जावै।