पाठक


बा घणी रूपाळी ही। उणी री कॉलेज मांय बी.एस.सी मांय पढ़ै ही। अर बो एम.. रो पढेसरी। आर्ट्स अर सांइसरी न्यारी-न्यारी फैकल्टी। न्यारी-न्यारी क्लासां। कॉलेज बिल्डिंग रै अेक कानी सांईस री क्लासां तो दूजीकानी आर्ट्स री।
साइंस वाळा सगळै दिन क्लास रूम मांय बड़्या रैवै। कदै इज लैब मांय न्यारा लफड़ा। पण आर्ट्स वाळा मरजीरा मालिक। जीव मांय आवै तो क्लास मांय जावै अर नीं तो बरीन्डो अर कै लान मांय। परीक्षा री बगत इंपोर्टेंटपांच-दस क्यूसनां रै टिक तो लगावणी है। बस हुग्या उणां नैं याद कर` बी. पास। आर्ट्स वाळा नैं साइंस वाळाबापड़ा` लागै।
लेक्चरर रो घुरको। सांइस वाळा रै इज पांती। उणां नैं प्रेक्टीकल मांय नम्बर लेवणा हुवै। आर्ट्स वाळा साम्हीलेक्चरर घुरको करै के बाण थोड़ी इज है। दूजै दिन उण रो रोड़ माथै जळसो काढ़दे। लेक्चरर खुद उणां सूंराम-रमी कर` चालै।
आर्टवाळा राजनीति रा अेक लम्बरी। आज ताणी कॉलेज रै स्टूडेन्ट यूनियन रै चुनाव मांय आर्ट्स वाळा इजप्रेसीडेन्ट बण्या। बणै क्यूं नीं ? उण कन्नै इज फालतू टेम हुवै। धरणों, प्रदरसण अर मारा-कूटो। साइंस मांयकठै ? साइंस मांय तो फगत सेलिबस रै आगै धरणूं हुवै। अर मार्कसीट मांय प्रदरसण। अर धरणो प्रदरसणनीं हुवै तो मारा-कूटो घरां माचै।
बात चालै ही उण री। बा बी.एस.सी रै तीजै अर आखरी साल मांय। बो जद बरीन्डै मांय बैठ्यो हुवै तो घणी बरउण री निजर उण माथै पड़ै। बा आपवाळै क्लास रूम रै बारलै जंगळै सा`रै बैठै। मन चंचळ हुवै। पण हुयां के?
दोवूं कदै इज आमी-साम्ही को हुया नीं। संजोग इज को बैठ्यो नीं।
हां, सालीणो जळसो हुवै जद बीनैं घणी देखण रो मोकौ मिलै। स्टेज री बो क्रीम। कॉलेज री छोर्यां सगळी स्टेजरै अड़ूअड़ बैठै। उण री निजरां सदीव बीं कानी रैवै। पण बो बीं कानीं जोवै। दूजी छोर्यां उण रै कूणी मारै। पण बानाड़ को साम्है नीं। अर स्टोरी बठै री बठै इज।
कीं इन्नै-बिन्नै रा सुतर भिड़ाया बीं। पण बै सुतर उण`रै लाग्या कोनी। कीं न्यारा-न्यारा भायला नैं मिल` इजकाम सूप्यो। पण अभिकिरिया हुवी कोनी। कै तो तत्त्वां रो मेळ कोनी हो अर कै तत्त्व एक्सपायर डेट रा हा। ठानीं पण रिजल्ट ऑल ओवर जीरो रैयो।
दिनूं-दिन उण रै तोड़ा-चूंटी बधती जावै। उणरी खोज खबर सगळी काढ़ली पण हुवै कांई ? उण रो अेक-अेकपग कीं टेम कठै मि`लै, बो सगळी जाणै पण उण री हिम्मत नीं पाटै। साम्ही जावण री सोचै घणी पण सोच्यांके हुवै?
बो आपरा सगळा टारगेट भूलग्यो। वनवीक सिरीज अर मॉडल टेस्ट पेपर बा इज। कहाणी बा इज अर कविताबा इज।
कॉलेज मैगजीन मांय बो घणूं छप्यो। पण ईं साल री कॉलेज मैगजीन छपण नै त्यार। पण रचनावां कठै। बै तोरचीजी इज कोनी। अेक इज तो उण री रचना रो प्लाट हो अर बो इज आगै को चालै नीं। करै कांई?
अेक नुवीं आफत मोल ले ली। अेक तो पैला इज ही। पैलां री आफत ? नांं करो थे उण री बात। अेक पाठकउण सूं कुचरणी करै। दोय सालां सूं मटो रोजगो कागद लिखै। अखबारां अर दूजी मैगजीन्स मांय छप्योड़ीउणरी रचनावै पेटै टीप राखै। टीप इज सजोरी।
कदै इज करेक्सन तो कदे इज सलेक्शन। बो पाठक उण सूं घणूं हेत राखै। अर पाठक सूं उण रो हेत इज होग्यो।उण पाठक सूं बीनैं कीं सीखण नैं मिलै। खरी-खरी टीप सूं बो आपरी आगली रचनावां की इम्प्रूव्ड करै। अररचना रो की स्टेंडर्ड बढ़ै। मासो-मासो इज तोळो हुज्या।
बीं पाठक रो बो घणू आभार मानै। पण बीं पाठक नैं बो थैंक्स किंया केवै? बो पाछो लिख को सकै नीं। उण पाठकरै अेक कागद मांय अेक दिन कीं चितराम मांडेड़ा आया। उणां रो बो कीं सेन्स नीं काढ़ सक्यो। कै तोसब्जेक्ट सूं बारै री बातां ही, कै पछै डूंगी। पण कीं हुवो भलां इज, कारीगरी ही चोखी।
म्है इज कठै आग्यो? बात उण री चालै ही। बा पढ़ाई मांय घणी हुंस्यार। टॉपर बतावै हा बींनैं भायलां रा सुतर।
एक्जाम रा घणा दिन नीं रैया अर आफत मंडी इज रैयी। एक्जाम पछै तो बा अठै क्यांबेई रेवै ? बी.एस.सी कर`आपरै एडै सिर जा पूगसी। अठै एम.एस.सी तो है कोनी। अर बा अठै री इज थोड़ी है। अठै तो उण री मौसी बतावैहा सुतर।
पास किंयां होस्यां? चिंत सतावण लागी। इंपोर्टेंट क्यूसन तो याद करणां इज पड़सी। दूजी घालमेल रो बगतआग्यो। अर इब तो उण री सगळी आस इज मिटगी। बा आपरी पढ़ाई पूरी कर` उठज्यासी, पछै कांई हुवै? क्यूंपीड़ उठावां?
बात आयी गयी हुगी।
लाइब्रेरी मांय बो आज बुक्स छांटै हो। इंपोर्टेंट क्यूसनां रै खातर। चाणचकै इज उण री निजर अेक बुक माथैपड़ी, उण उपरां जबरो जिल्द चढ़ायेड़ो हो। अर जिल्द उपरां कीं चितराम मांडेड़ा हा।
उण बुक नैं उठायी। चितराम ध्यान सूं देख्या। बै सागी इज चितराम, जका उण रो पाठक उणनैं बणा` घाल्याहा। बो सस्पेन्स मांय पड़ग्यो।
बुक टंटोळी पण कठै इज कीं नाम-ठिकाणूं को मंडेड़ो लाद्यो नीं।
बो लाइब्रेरियन कन्नै बा सागी बुक लेय` गयो। कीं रै नाम सूं इस्यू ही बुक। बुक मांय लेवणवाळा रा कार्डनम्बर अर तारीख तो मांडेड़ी इज हुवै। ठा लगाई।
बा सागी इज ही। म्हारा सुतर सगळा काम करग्या। इज बात ही तो पैली इज कीं आइडियो दे सकै ही। म्हारीफेन अर म्हारी पारखी पाठक। म्हैं उणरो पारखी। पछै आंतरो क्यूं?
इब नीं रैवणद्यूं। सगळो भेट मिटा देस्यूं। बण हिम्मत करी।
साइंस रा प्रेक्टीकल एक्जाम रा दिन हा। बा क्लास रूम मांय, कै लैब मांय हुसी।
बो उंतावळ कर` गयो।
बा लैब मांय इज ही। उण कीं नीं देख्यो। झट दांईं उणनैं लैब सूं बारै बुलाली।
बा आगी। पैली बर साम्ही-सांम।
''थूं जद म्हारी पाठक अर फेन है तो म्हनैं बताय सकै ही। म्हैं थारै खातर घणूं आखतो हुयो। थू थारै किणीकागद मांय नाम पतो तो लिख्यो कोनी। अर पछै म्हैं थानै कीं केवै थोड़ो इज हो। म्हैं तो थारै साथै दोस्ती करणूंइज चावै हो .........``
बात पूरी हुवै उणसूं पैली इज उण रै गाल माथै चटीड़ माच्यो। अर बा पाछी लैब कानी मुड़गी।
मुड़ती कानीं उण री फेंरू निजर पड़ी। गळै मांय मंगळसुतर चिलकै हो। आंख्या मांय कीं आसूं इज ........ '