रपट


राकेस अर आलोक री मोटर साइकिल आपस मांय जोर सूं भिड़गी। लागी तो कीं रै नीं पण राकेस री मोटरसाइकिल रो कळजो हुग्यो। भिंड़त हुंवता इज असवाड़ै-पसवाड़ै री दुकानां मांय बैठया मिनख सगळा भेळाहुग्या।
'लागी तो नीं है।` सगळा राकेस अर आलोक नैं बूझै।
लागी तो कोनी। सगळा नचीता हुग्या। पण आप आपरी सगळा हूंस काढै।़ देख` चाल्या करो। मर ज्यांवतानीं इब। छैला बण्या फिरै। मोटर साइकिलां बिना चालीजै कोनी। सूरदास कठै रा।
ईं बापड़ै री गळती इज कोनी। सगळी गळती तो ईं री है। ईं संू ब्रेक को लाग्या नीं। इण तो डाटली ही ठोड़ इज।दोय अेक मिनख आपरी टीप राखी। उणां राकेस नैं सही अर आलोक नैं गळत बतायो।
इब सगळा आलोक रै बारखर फिरग्या। आप आपरी रागळी करै। आलोक इज सांचली हंकारली। म्हारै सूं ब्रेकको लाग्या नीं।
''कीं रो है अर थूं कीं रो।`` इब लोग-बाग जाणकारी काढैै़। जाणै सळटिड़ो बाप-दादै रै नांव बिना हुवै कोनी।
''म्हैं ओम सरावगी रो हूं जका कॉलेज मांय लेक्चरर है।`` आलोक आपरा बायोडाटा देवणा सरू कर्या।
''अर थूं``
''म्हैं मोहन सारस्वत रो। जका वाटरवर्क्स मांय नौकरी कर्या करता पण इब रैया कोनी।`` राकेस बतायो।
''ओम जी सरावगी तो म्हारै पापा रा घणां जाणकार हा। पापा घरां घणी बार जिकर कर्या करता। म्हे जाणोजाणनिकळग्या। आपी इज सळटा लेस्यां।`` राकेस सगळा नैं टरकावणा चाया।
बात सुण` आलोक रै इज जीव मांय जीव आयो।
''थारो कांई नाम है?``
''आलोक।``
''अर थारो?``
''राकेस।``
''म्हारी गळती हुगी यार। देख थारी मोटर साइकिल म्हैं ठीक करा देस्यूं।`` आलोक सळटावणी चायी।
''पछै आपां पुलिस रपट मांय क्यूं पड़ां। देख, लागी कोनी इज ठीक है। मोटर साइकिल तो नुंवा पुरजाघलावतां इज पाछी बिस्सी री बिस्सी।`` राकेस सळटिड़ो कर दियो।
दोवूं ऑटो पार्टस री दुकान जाय` पुरजा पातड़ा ओजूं घला लिया।
''पीसा म्हैं कालै दे देस्यू। अेकर थूं दे दे। म्हारै कन्नै है कोनी।`` आलोक राकेस नैं कैयो।
''ठीक है। आपां जाणोजाण हुग्या। कोई बात नीं। काल म्है इज थारै घरां सूं ले लेस्यूं। म्है जाणूं हूं थारो घर।`` कैय` राकेस आपरी खुंजा मांय सूं पीसा काढ़` दुकान वाळै नैं दे दिया।
राकेस दूजै दिन आलोक रै घरां गयो। ओमजी बठै इज। पीसां खातर जाबक नटग्या। कन्नै खड़्यो आलोक दांतदिखावै। राकेस धोळो हुग्यो। जबरी हुयी।
ओम जी भोळावण दी- ''जा पुलिस रपट करा दै। गळती थारी इज ही। अर पछै बिनां कागजां री मोटर साइकिलथू इज चलावै।``
किणी इज ओमजी नैं राकेस कन्नै मोटर साइकिल रा कागद नीं हुवण री बात पूगा दी ही।
''थे पापा रा जाणकार हा। इण पेटै म्हैं रपट को लिखायी नीं।`` राकेस कैयो।
''जा, थूं अब लिखा दै। थारा पापा म्हारा को जाणकार हा नीं। पीसा `कां रै को लागै नीं?`` ओम जी आपरोरूप दिखावंता थकां कैयो।
राकेस आपरो सो मूंडो लेय` आग्यो। नुंवी मोटरसाइकिल रो कळजो कर दियो। जाणकारी पेटै छोड्यो अर इज रपट री कैवै। ओमजी जबरा लालची निकळ्या। बात रो कीं संको कोनी मान्यो। उणा रो छोरो साथै चाल`सगळा पुरजा हामळ भर` घलाया हा।
राकेस दोघाचिंती मांय। पण कांई करै? भलै`रै साथै ईंया` हुवै।
उण कीं दूजा मिनख इज ओमजी कन्नै घाल्या पण बात बणी नीं। ओमजी पीसा बंचावण री जाबक सोचली।
राकेस हजार-दो हजार रिपिया री बात नीं मानै। बात विस्वास री मानै बो जुगत भिड़ावै।
किरड़ै रै साम्ही तो उणी री भांत इज रंग बदळ` दिखावणूं पड़ै। आखर मांय राकेस तैय कर्यो।
बण दो-च्यार दिनां पैली` सगळा कागद त्यार करवाया हा। स्यात् इण बात रो ओमजी कनैं बात पूगावणियैंनैं ठा कोनी हो।
राकेस सगळा कागद लिया अर सीधो थाणै मांय गयो। ओमजी री जाणकारी पाण उण रै छोरै नैं छोड्यो हो।उणां जाणकारी री कदर इज नीं करी तो किस्या ओमजी?
थाणैदार कीं आपरी हुस्यारी दिखायी। थोड़ी ताळ पछै ओमजी अर आलोक नैं हाजर कर लिया। घणी खंचाईकरी। ओमजी राकेस रै कागदा नैं उथळ-पुथळ रै देख्या। आखर मांय साच कैवणी पड़ी।
ओमजी राकेस कानी देखै हा। अर राकेस मिनख रो मतलबी पणो। थाणैदार राकेस नैं रपट माथै दस्तखतकरणै रो कैयो।
राकेस ओमजी रै कानीं देख्यो। अर अेकर ओजूं बूझ्यो - ''पीसा देवो हो के?``
ओमजी आपरी खुंजा मांय हाथ घाल लियो।