धरमसाळ


संदीप घणी उतावळ करी पण मोड़ो होय इज गयो। सै` सूं गांव कानी जावण री आखरी बस भाजतां-भाजतांनिकळगी। इब के इलाज। और कोई गांव जावण रो साधन कोनी। भनीण ताणी तो बस आधी` रातनैं जावै।पण बांय किंया पूगां ? भनीण सूं बांय है इज घणू आंतरो।
अेकर सोच्यो चालो भनीण जाय` रातनैं कीं रै घरां सोय ज्यासां; दिनूंगै उठ` बांय कानी रो कोई साधनटंटोळ्स्यां। पण पछै मन मांय आयो कै रातूं पड़्यो तो कीं दूजी जगां रैवणूं है। पछै भनीण जाय` के करस्यां।अठै सै` मांय इज रह जास्यां। कीं धमरसाळा मांय रात बासो ले लेस्या। आधी रात हुयां भनीण पूगस्यां रात्यूंदुख क्यूं उठावां?
संदीप बस अड्डे सूं आपरो सामान उठा` धरमसाळ टंटोळण खातर बहीर हुयो। दो-च्यार धरमसाळ मांयजाय` संदीप बूझ्यो। पण सगळां मुंडो बा राख्यो। सौ रिपिया सूं कमती किस्सो इज चौकीदार, मैनेजर को मांगैनीं।
अै धरमसाळ तो गरीब गुरबै खातर इंर्याज रैवणनैं बणायेड़ी हुवणी चाहिजै। पीसा लेय` तो राखै उणां नै तोहोटल कैवै। पछै पीसा इज लेवणा है तो धरम रो नांव साथै क्यूं?
पण इलाज के। कठै इज तो रैवणो हो इज। अर होटल तो और इज मंहगा हुसी। आखर मांय संदीप अेकधरमसाळ रै चौकीदार नैं पटायो। रसीद कोनी काटूं; सौ री जगां पचास दे देयी। सौदो तय हुग्यो।
समान ठांयचै सिर मेल` संदीप धरमसाळ रै न्हावण घर मांय बड़ग्यो। कीं तो पाणी गेर्यां सगळै दिन रो थकेलोमिटै।
न्हा` पाछौ आयो तो चौकीदार साम्ही खड़्यो दांत काढ़ै पण बोल्यो कीं नीं। बो सीधो सट आपरै मांचै कनैपूग्यो। मांचो कांई मूंज री टूटेड़ी सी मांचली। बरोबर मांय लाइन लगायां दस बीस घालराखी। कीं खाली तोकिणी माथै उण जेड़ा दुखीयारा टेम काटै।
संदीप उणां नै ध्यान सूं जोवै। कुणी इज सैंदो-मैंदो निकळज्या तो बतळावण हुज्या। पण उणियारा अणसैंदा।गामांयी उणियारा पण अपणायत कोनीं। अेक उण रै सायनो सो जींस पेंट अर डबड़कां री लाल बुरसट पैरेड़ोछोरोे। इंर् सागै कीं टेमपास हो सकै। संदीप सोच्यो।
संदीप उणरी आंखां सूं आंख्यां मिलायी तो बो झट सारै लागग्यो। जाणै बो इज ही चावै हो। घणीं बंतळ हुयी।हो इज बातेरी बो। किणी प्राइवेट कम्पनी रो एजेंट हो। बी. कर` दोय हजार मांय इज जुगत भिड़ाइजी।बीकानेर रो व्यासां रो बतायो। बाप बैंक मांय बाबू।
संदीप नैं अब दसवीं मांय फेल होवण रो अफसोस नीं हो। आगै बो जे पढ़तो तो इज के करतो? दोय हजार। दोयहजार तो बो गांव री किराणै री दुकान मांय घरां बैठ्यो कमालै। खैर।
दोवूं आप-आपरी बातां बतळावै। पसवाड़ै री मांची रो अेक मिनख इज उठ` सारै लाग्यो। बो बातां नीं चावै हो।बो म्हारै कन्नै सूं बीड़ी भाळै हो। अर आपरो सो मुंडो लेय` पाछो उठग्यो।
धरमसाळ रै पसवाड़ै रै होटल रा बिहारी छो`रा ग्राहक पटावै। पंदरा-पंदरा मांय रोटी खावो। साम्ही वैष्णोभोजनालय है। दोय सब्जी अर दाळ नाकै। रोटी भावै बिती। आपरो परचार करै।
संदीप इज उण सूं मीट जोड़ी। ठै भाज` कन्नै आग्यो। ''बाबूजी दो थाळी के?`` छोरो अगाऊ बोलै।
''अठै इज ल्यार खुवासी के?`` संदीप छेड़्यो।
''ना बाबूजी, चालणू तो होटल मांय पड़सी।`` छोरो बारनै देखतां थकां कैयो।
दोवूं खड़्या हो` होटल कानी चाल्या। रोटी क्यां री भूख मेटण रो साधन। सब्जी बस चाटै सूं कमती नीं। दोवूंपेट लिवाड़ी करली। पीसा संदीप दिया। व्यास देवणा चायो पण संदीप नट्ग्यो।
''थे पंडत हो अर म्हैं थारै भोजन रा पीसा दे कीं पुन्न-धरम कमाल्यूं। पीसा तो इंर्या` ही तो लागणा है।`` संदीप री बात सुण व्यास इंर् को धक्को कर्यो नीं। बीं रो के जावै हो?
पाछा धरमसाळ मांय आया तो चौकीदार आंख्यां काढ़तो मिल्यो।
''सामान ढ़ब सिर छोड़` जावणू हो। किणी नैं संभळा` जांवता। थारो बाप कोई उठा` ले जावंतो जद।`` चौकीदार साची कैयी। संदीप कान पकड़्या तो चौकीदार दांत तिड़का दिया।
व्यास आपरो मांचो संदीप रै मांचै रै अड़ोअड़ घाललियो। ईस माथै ठोडी टेक्यां दोवूं मोड़ै ताणी दुनिया रै बदळतेरूप री बातां करता रैया।
चौकीदार माचै रो पागो ठरकायो तो संदीप री आंख खुली। दिन चढ़ग्यो हो। तकड़ी नींद आयी। सै` रो थकेलोआखतो कर दियो हो।
सिराणै कानी संदीप री निजर पड़ी तो धोखो हुयो। सामान.....
चौकीदार नैं देख्यो, बो कीं दूजा सूत्योड़ां रै मांचा रा पागा ठरकावै हो। ..............व्यास।
''व्यास जी गया के ?``
चौकीदार कानी उडतो सो गयो।
''गया भाया बै भागपाट्यां इज गया। कीं उणा कन्नै सामान तो घणू हो इज। टेम्पू कर` अजमेर री बस पकड़ीही।``
''अजमेर....... बै तो बीकानेर रा हा नीं।`` चौकीदार कानी देख्यो संदीप।
''म्हनैं तो अजमेर रा बतावै हा। पछै के थारली ज्यूं बां रसीद कटाइ ही ........?`` चौकीदार उथळो दियो।
''उणारै सामान मांय अेक सामान सूं भरेड़ो कट्टो अर काळै रंग रो अेक थेलो हो के ?``
''हां भाया, हां बै इज तो जका थे रोटी खावण गया जद इंर्याज छोडग्या हा ?`` चौकीदार हामळ भरी।
संदीप माथो पकड़ लियो। बिनै चौकीदार रा रात रा सबद गरणावंता सा लाग्या कै कोई ले जावंतो थारो बापजद............
संदीप ओजू चौकीदार कानी देख्यो। बो न्हावण रै पीसां री ताकीद करै हो।