राड़


इराक री दोय मुसाफरी कर` आग्यो। काळी-कोसां पड़्यो रैयो पीसै रै खातर। पण पछै इज घर मांय थाग कोलागैनीं।
घर है` कुवो। कमायो उण सूं ज्यादा रो घरै खळो हुग्यो। इता घरां खरचा हुया करै। अर पछै घणूं ठाडोपरिवार इज कोनी। दोय छोरी अर दोय छोरा।
`रै आं टींगरां रो तो कितो` खरचो है। खरचो तो इण सिणगारड़ी रो है। बणी-ठणी रैवै हूरम री ज्यूं। पोडरअर लिपिस्टक मांय आटै-दाळ सूं ज्यादा रो चपीड़ चेपै। पछै पै`रण नैं इज नुंवा-नुंवा चाहिजै।
रामेसर रै बस आजकाल इज सेको। ईं बात नैं ले` घरां दिन मांय दो-तीन बर हंच मंडै।
पाड़ौसी भींतां चढ़-चढ` सुवाद लेवै। अर पाड़ौस्यां नैं भींता चढ्यां देख` रामेसर री मूंछ्यां तण ज्यावै। जाणैबो जुद्ध लड़तो हुवो। अर जुद्ध मांय हारणूं नीं चावै। सिणगारड़ी इज के कमती। साम्ही पाणां इस्सा मांडै कै नापूछो थे बात।
आं रो रोजीनै रो हंच देख` टाबर बिस्या इज बणै। खेलै तो इज डिस्सूं-डिस्सूं कर` लात-मूका चलावै।
घर रो डोळ बिगड़र्यो।
रामेसर कदै इज नीं सोची कै घणो खरचो हुयो तो बैठ` हिसाब लियां समझ मांय ज्यासी। अर फिजूली हुगीजकी हुगी, आगै सूं तो बा रोकी जा सकै। अर इस्सी बात आज रै बगत मांय दूजो समझावै कुण? सगळां नैं तोख्याल चाहिजै। बळती मांय पूळा तो बै जरूर गेरण आज्या। पण बुझावै क्यूं?
आज कीं हंच तकड़ो मंडग्यो। रामेसर कीं घणो रिसाळो होग्यो अर सिणगारड़ी नैं चोखी-भली झेगरदी।सिणगारड़ी बास-गुवाड़ रै ऊपर-ऊपर अरड़ावै। मार दी रै..... मार दी रै ......
पण उणां रै कन्नै कुण इज नीं गयो।
दो-चार घंटां कूका रोळो जद ईंया इज माच्यो रैयो तद रामरख सूं रैयो को गयो नीं। चालो समझास्यां। बोचाल` गयो।
बडेरै रामरख नैं घरां आयो देख` सिणगारड़ी कीं संको मान्यो। अर कीं चुप्पी करी। रामेसर इज लाल-पीळोहोवणूं छोड्यो।
''ना लाडी, घरां मांय ईंया कर्या करै?`` रामरख कैय` रामेसर नैं समझावै।
''के करां ताऊ, रांड है इज सेको......`` रामेसर री रीस सगळी गयी कोनीं। ''भाईड़ा, तो समझा-बूझांर जपा।मारो-बेधो करां किस्सो जाचो जचै। घणां घरा मां सेका मंडै। पण भाईड़ा, आपरै घरां रो गोबर नैं इज कठैथेथड़णूं पड़ै ....`` रामरख सीख देवै।
''ना ताऊ, गोबर थेथड़ण रो कोनी। बठळ मांय घाल` उकुरड़ी माथै गेरण रो है।`` रामेसर टेढ़ी निजरां सूंसिणगारड़ी कानी देखता थकां कैयो।
इब सिणगारड़ी सूं को रैयीज्यौ नीं।
''हां, थूं तो सुहाग है म्हारो, माथै ऊपरां सो`वणै रो ......``
''रांड थूं कोनी रैवै के। बूढा देखै नीं बडेरा।`` रामेसर खड़्यो हो` सिणगारड़ी कानी ताचक्यो।
रामरख रामेसर रो हाथ पकड़` पाछौ बैठालियो।
''ना बेटा, आपस मांय रळ-मिळ` रैयां इज गिरस्थी चालै। अेक-दूजै खातर दोवूं चोखा हुवै। अर पछै जीवणभर रो साथ हुवै लोग-लुगाई रो। धीरज सूं निभाणूं चाहिजै।`` रामरख सिणगारड़ी कानी देख` कीं समझावंणीचायी।
''देखो घिरस्थी घणां तपां रै पाछै मिलै। अर थे लड़-लड़` ईं घिरस्थी नैं गंवाद्यो तो किती माड़ी बात हुवै। अरसिणगारी थूं तो म्हारी बेटी समान। सुसरो बाप इज तो हुवै। थन्नै समझणूं चाहिजै। हिसाब-किताब री राड़ है तोथन्नै रामेसर नैं विगत सूं हिसाब बता देवणूं चाहिजै। अर जे दो पीसा कुजगां खरच हुग्या तो कांई हुयो ? बो इजबताय` ओजूं खरच नीं करण रो संकळप ले लेणो चाहिजै। अर रामेसर सगळी बात मांड्यां थारी के मानसीकोनी ? मानसी।`` रामरख समझावण दी।
''ताऊ, जद थे बेटी मानो तो साच बताऊं। थे केवौ बिंया म्हैं पैली इज कर दियो। रिपियो-रिपियो लाग` घरखरचां मांय सौ-हजार रो भारो बणज्या। चिमठी-चिमठी रो हिसाब थोड़ी इज राखीजै। अर पछै मोटा-मोटीसगळो परवानो आंनैं दे दियो। पण अै म्हारै ऊपर धरोज करै जद नीं। म्हारी मानै इज नीं। घरां आवंता इजलाल-ताता होय` ऊपर चढज्या। कीं नीं सुणै अर समझै। बारलां री बात मीठी लागै जद घर वाळा री कुणमानै.....`` सिणगारड़ी आपरो रोवणूं रोयो।
''नीं थूं जे रामेसर री मानसी अर ढब सि` समझासी तो रामेसर इज थारी मानस्सी। क्यूं रामेसर ?`` रामरखरामेसर कानी देख्यो रामेसर री नाड़ हालै ही।
''बोल` कैय रामेसर, सगळी बात, कैयां हूंस कढै अर मन मांय कीं खरळ-बरळ को रैवै नीं।`` रामरख सळटिड़ोकरवाणूं चायो।
रामेसर कीं उथळो देवंतो उण सूं पैलां इज गोफियै रै भाटै री दांई अेक बारनै सूं चिंचांवतो भाटो आयो अररामरख रो पटपड़ो खोलग्यो। खून रा रींगा चालग्या।