मां-बाप


''उणां रो के? बै तो दरडै मांय पड़ सकै है, थूं पड़ ज्यासी के?`` कमलेस आपरै छोरै रै थाप सरका दियो।
''म्हैं तो लेस्यूं........`` छोरो रोयो कोनी।
''लेस्सी थूं थापां री और.........``
''थाप मारलै चायी। ज्यान सूं मार दै। पण म्हैं लेस्यूं। म्हनैं सगळा क्लास मांय चिग्गावै।`` छोरो आपरो दुखरोवै।
''थूं चिगै जद चिग्गावै नीं।``
''बिनां बात थूं चिग्गै सकै है के?`` छोरो सुवाल कर्यो।
''ज्यादा बात आवै है के? लट्ठ दिखै है के?`` कमलेस सारै इज पड़ै लट्ठ नैं चक लियो।
छोरो भेळो भेळो होयो। लट्ठ रो डर कीं नैं कोनी लागै। कीं बोली कोनी पाटी पण आंख्यां मांय इब आंसू आग्या।
''मार्यां रोवै कोनी, मार्यो कोनी जद आंसू टळकावै। जबरा तींदर करण लागग्यो छोरा।`` कमलेस लट्ठ नाकैपटक दियो।
छोरो कीं नीं बोल्यो। बोलबालो खड़्यो रैयो।
''भींत बण्यो के खड़्यो है? पैली थन्नै कैयो हो नीं पाडियै नै खेळ ऊपरां पाणी प्याव` ल्या।`` कमलेस ओजूंछोरै नैं कुचरण लागगी।
छोरो बोलबालो पाडियै कानी चाल पड़्यो। कमलेस इज आपरै काम मांय लागगी।
आथण रै बै घरां आया तो कमलेस आंवता इज सिकायत करी छोरै री।
''इण छोरै नैं थे सिर चढ़ा राख्यो है, म्हारै कन्नै सूं कदै इज हाड-गोडा तुड़वासी। पछै थे ओळमूं देस्यो।`` कमलेस छोरै रो सगळो जिम्मो उण उपरां गेर दियो।
''के बात हुयी ?``
''को बात नीं को बात रा छूंतरा नीं......``
''पछै क्यांबेई बिचारै पर लाल ताती हो री है।``
''बिचारा दुनियां मांय थे दोव इज हो। अेक थे अर अेक बो थारो लड़धो।``
''म्हारै सूं बिचारो कुण होसी इण दुनियां मांय जकै रै थारै बरगी पांती आयी अर पछै बो म्हारो इज लड़धो है केथारो कीं कोनी के ?`` उणनैं कीं झाळ आगी।
कमलेस उणां रो रुख देख्यो अर कीं मीठी हुयी।
''म्हैं ईंया कोनी कैवूं। म्हैं तो कैवै ही कै टींगर म्हनैं सगळै दिन सेकै। बिना काम रै इज।``
''तो के म्हनैं सेकै ? खेत मांय थारै महाराणी सूं जायीजै कोनी अर घरां थन्नै छोरा सेकै।`` उण कैयो।
''काम हुवै जद सेको भलाईं। पण आज री ज्यूं बिना जरुत इज....``
''बिना काम इज थूं घरां पड़ी बाजरी रो नास करै है नीं।`` लड़ाई दूजो मोड़ ले लियो।
''म्हैं बिना काम री। काम तो थे करो ? पीदियै पाण आकास डटर्यो है के ?`` कमलेस इज कमती को रैयी नीं।
''नां थूं डाट राख्यो है।``
राड़ बधसी सोच` बो बारनै चाल पड़्यो। साम्ही आंवतो छोरो मिलग्यो।
''खेल` आयो है के रै?`` उण छोरै नैं बूझ्यो।
''हां बाबा।``
''दिन मांय थूं थारी मां नैं क्यांबेई सेकै हो रै?``
''ना बाबा, मां कन्नै सूं तो म्हैं फगत तख्ती मांगै हो।``
''ब्यावै है के थारी मां कन्नै तख्ती?``
''बाबा सगळै क्लास रै छोरां कन्नै है तख्ती। म्हारै कन्नै कोनी। म्हनैं गरीब कैय` सगळा चिग्गावै।``
''तो म्हनैं कैय देंवतो। थारी मां कन्नै पोपावण री के जरुत ही?``
छोरो कीं बोल्यो कोनी।
''भींत सो के खड़्यो है। इन्नै आव। ले बीस रीपिया।``
छोरै कानी हाथ मांड्यो।
''के करसी आं रो?`` उण बूझ्यो।
''तख्ती......``
''तख्ती ओजूं ल्यायी। आज थारी मां घरां आंवता इज मूड खराब कर दियो। रांड है इज इस्सी। थूं भाज` जासूरतै कन्नै सूं देसी दारूड़ी रो अधो ल्याव। कीं जक पड़ै तो.......``
छोरो नोट नैं भेळो करतो सो चाल बहीर हुयो।