सीर


खेतो कीं भोळो पड़ै। जीवण री गत सूं नीं फगत बातां मांय। अगूण री आथूण नीं कर जाणै, बो मिनख आज रैटेम मांय बिंया भोळो इज हुवै। पण खेतो भोळो हुवो चायै, मन रो जाबक साफ कीं सूं कीं कैवण हुवै तो सीधोकैय दे। मन मांय गांठ को राखै नीं।
अर खेतै रो इज रूप उण रौ वरदान। सगळा खेतै सूं हेत करै। भोळप कीं नै से`दै कोनी, अर से`दै नीं तो उणसूं कुण ईसको राखै ? सगळा खेतै नैं आव-बैठ देवै।
खेती रो चींचड़ खेतो। नाम सारू काम। घणो खपै खेत मांय। `रै मांय सगळां सूं बती दाणा काढ़` आयी सालघरां ल्यावै खेतो।
पण जमाना लगोलग थोड़ा इज हुवै? जे लगोलग जमाना हुवै तो जमीदार नैं कुण नावड़ै ? पछै खेती जिस्योकाम कोनी।
च्यार साल होग्या। अधकाळ सा रेवै। बिंया काळ इज मानो। खावण खातर कीं दाणां हुवै कोनी। बस डांगरांखातर कीं घास-फूस सो होय` खड़ी फसल बिरखा रै तोड़ै बळज्या।
आपणै डांगर तो भूखा को मरै नीं। खोपड़ां-भंगूळी कानीं तो डांगरां सारू इज खावण नैं कीं कोनी हुयो, च्यार-पंाच सालां मांय। गांव रा मिनख गुवाड़ मांय बतळावै, तो खेतै नैं आपरै खेत मांय च्यार सालां रा लागेड़ानीरै-फूस रा कीड़ा-छींवर दीखै।
जे आपां आनैं खोपड़ा-भंगूळी कानी बेच` आवां तो चार-पीसा चोखा बंट सकै अर उण पीसा रै पाण बाजार सूंखावण खातर दाणां खरीद सकां। खेतो सोचै।
पण बठै जा` बेचणूं पड़ै। अेकलै सूं तो पार को पड़ै नीं। खेतो सांसै मांय पड़ग्यो। दूजै गांव रो गांवतरो खेतै नैंपहाड़ सो लागै।
मोहरसिंघ घरै बोरो मांगण आयो तो खेतै जिकर कर्यो।
''मोहरसिंघ खोपड़ा-भंगूळी कानी नीरो के भाव बिकै रै ?``
''ठा कोनी भिया। पण आपणै सूं तो कीं सावळ इज बिकै।``
''ठा लगा नीं यार, कीं नीरो बेच आंवता।`` खेतै मोहरसिंघ नैं कैयो।
''थारलो नीरो बेचै है के खरीद कर`?`` मोहरसिंघ बूझ्यो।
''ना खरीद कठै? म्हारलो इज। सोचूं नीरो बेच` कीं दाणां बपराल्यां।`` ''के बात करै भिया। नीरो जे खरीदकर` बेचै तो चोखो फायदो रैवै। म्हारै कन्नैं तो पीसा कोनी। म्हैं थारली ज्यूं हांेवतो तो कमाज्यांवतोभाईड़ा।`` मोहरसिंघ खेतै नैं आपरै मन री बात बतायी।
''म्हारै कन्नैं कींनै पीसा है?``
''क्यूं कोनी। अेकर नीरै रो कीड़ो घर रो बेच` आज्या। पछै उण पीसा सूं दूजां रो नीरो खरीद लेयी अर बेचआयी। चोखी कमाई हुज्या भाईड़ा। बोपारी तो काळ नैं उडीकै।`` मोहरसिंघ सीख दी।
खेतै रै कीं बात जची। मोहरसिंघ तो बोरो ले` आपरै घरां उठग्यो पण खेतै नैं ऊकचूक करग्यो।
बो सगळै दिन चिंत मांय रैयो। लाभ-घाटै री सोचै। अर लाभ-ही लाभ उण नैं दिखै। पण अेकलो जावण री बातआंवता इज माठो पड़ज्या।
मोहरसिंघ नैं जे सीर रळांल्यां तो?
खेतै रै दिमाक मांय बात आयी तो सगळी समस्या सळटगी। अर फटाफट मोहरसिंघ कनै जा पूग्यो।
चिलम पाणी पी` खेतै बात सरू करी।
''मोहरसिंघ, नीरै मांय साच्यां इज फायदो होय सकै के?``
''भिया, मौको है मत चूकै चौहान।``
''तो भाईड़ा, जे थूं हामळ भरदै तो बात बणज्या।`` खेतै मोहरसिंघ नैं न्यूंतो दियो।
''म्हैं.......... क्यां री हामळ ?`` मोहरसिंघ खेतै कानी देख्यो।
''जे आपां सीर कर` नीरो बेचां तो।``
''सीर, भाईड़ा बिनां सुंवाज होवै कोनी।`` मोहरसिंह आपरी पीड़ राखी।
''अेकर थूं कैवै हो बिंया करल्यां। अेक गेड़ै मांय म्हारै नीरै रो अेक कीड़ौ बेच` आज्यांवा। पीसा हो ज्यासी।बां सूं आपां बौपार करल्यां। थूं फायदो हुवै बिंया पीसा देबो करी। अेकर पीसा म्हैं लगाद्यूं।`` खेतै सगळी बातमांड दी।
''न्ह्याल करै भाईड़ा। दो पीसां रो रुजगार मिलज्या। अठै इंर्या इज गुवाड़ मांय जोइया नैं खून चुसावां।`` मोहरसिंघ मुळकण लाग्यो।
सीर तैय हुग्यो। मोहरसिंघ अर खेतो टेक्टर माथै नीरो लेज्या अर दूर गामड़ां मांय बेच` आवै। खेतै री मेहणतअर मोहरसिंघ रो दिमाक। दोवूं मिल` फायदो कर` ल्यावै, आयै गड़कै। दोवूं पांच-दस हजार रो फायदो कमालियो।
परसो अेक दिन घरां आयेड़ो। खेतै रै बोपार रो जिकर सुण्यो। परसो खेतै रै बाप रो धरम भायी। गावं पड़ौसी।दो पीसां रै गुंजास रो धणी।
परसै मन मांय खेतै रै बोपार मांय सामळ हुवण री तेवड़ी। दो पीसा लगा` की च्यार आनां ब्याज जोगा इजकमा लेवां बै इज चोखा। परसो सोचै।
परसै आपरी बात खेतै अर मोहरसिंघ साम्ही राखी। खेतै तो झट हामळ भरली पण मोहरसिंघ कीं स्याणफदिखायी।
''खेता भीया, घणी सीर री होळी आखर मांय बळ्या करै। अैकर ओजूं सोचले।``
''ना रै मोहरसिंघ। देख आपां जे कीं पीसा ओर लगा` चोखो नीरो खरीद` बडोड़ी गाडी भरा` बेचण जावां तोभाड़ै रो कितो फरक होज्या। टेक्टर च्यार चक्कर काटै इतो नीरो बडोड़ी गाडी अेकर मांय गेर आवै। सगळोटेक्टर रो भाड़ो गाडी सूं कितो ज्यादा पड़ै?`` खेतै कीं फायदो दिखायो।
बात मोहरसिंघ रै इज जची। टेक्टर बाईसौ रीपिया लेवै अेक गेड़ै रा अर बडोड़ी गाडी च्यार हजार। टेक्टर राच्यार गड़का अेकल गाडी गेरै। बाई चौके अठासी। कठै अठासी सौ अर कठै च्यार हजार। पांच हजार रो सीधोफायदो। बस के चाहिजै।
फटाफट तीनूं सीर घाललियो अर खरीद लियो अेक गाडी नीरो। भर` टेकदी काळ रै गांव मांय।
सच्चै सोदै सतसंग रा सेवक इज काळ मांय कीं इमदाद करै। सिरसो ठाडो धाम। बठै सूं गाडी री गाडी नीरै रीडांगरा खातर गांवां मांय मुफत पूगाइजै। मिनखां सारू आटो-दाळ। जबरो धरमादो बांटै।
अर जठै खेतै, मोहरसिंघ अर परसै नीरै री गाडी खाली करवाई। उणी इज गांवां रै असवाड़ै-पसवाड़ै मांय सच्चैसोदै सत्संग री गाड़ी पूगगी।
मुफत रो मिलै जद खरीद` कुण लेवै? नीरो पड़्यो रैयग्यो। कुण इज नीं खरीद्यो।
घणां दिनां पड़्यो राख्यो तो ब्याज जोड़` नीरो मंहगो हुज्या। बेचण री उतावळ करै, पण खरीदै कुण?
आखर मांय भाव तोड़` नीरो बेचणूं पड़्यो पण घाटो लागग्यो।
परसो आकळ-बाकळ हुग्यो।
''भाईड़ो थे तो पैली इज घणां कमाया हा। म्हैं नुंवों सीर घाल्यो। थे घाटो पूग सकौ पण म्हैं को पूग सकूंनीं। म्हनैंलाग्या म्हारा पीसा देद्यो।`` परसो आपरो हुक्म खेतै अर मोहरसिंघ नैं सुणायो।
''ईंया किंया। घाटो बरोबर। फायदो बरोबर। बिजनेस मांय इंर्या इज हुवै। पीसा पाछा क्यां रा?`` मोहरसिंघबोल्यो।
''आग लगावो थारै बिजनेस रै। म्हनैं म्हारो सागी हिसाब देद्यो।`` परसो आकरो बोल्यो।
''ईंया किंया देद्यां?``
राड़ माचगी। बात ढ़ब को लागी नीं। परसो हीक रो धक्को करै।
घणी गरमायी हुवी। पण बात तो ढ़ब सि` ढूकै।
परसै री मनस्या पूरी नीं हुयी।
''धूळ भायलपै मांय`` कैय` परसो खड़्यो हो` चाल बहीर हुग्यो।
गांव वाळा सीर रा ख्याल देखै हा।