बीनणी

मगनो कीं माठो पड़ग्यो। उण रै उणियारै मांय इज कीं फरक आग्यो। उठै चे`ळको नीं हो। आंख्यां रीरगतवरणी चिमक तो फीकी पड़णी इज ही। पण बातां रै सटकारै मांय जको कीं बदळाव आयो बो सोचण जोगहो। जीवण रा अणुभव अर जथार्थ दीठ रो सांगोपांग मेळ होग्यो बातां मांय। कठै इज हाथपाई नीं। खरी-खरी अरठायी। निरासा कोनी पण उत्साह इज घणूं नीं।
मगनो सदीव सूं इस्सो नीं हो। हरमेस बो कीं नै कीं रै साथै कुचरणी करण वाळो जीव हो। मसखरी उणरै सुभावरो अेक अंग हो। टाबर हुवो चाये बडेरो, मगनो छेड़्यां बिंना को रैवंतो नीं। जकै नैं छेड़तो बीं रै तो कीं बगतसि` चिणखो लागतो पण देखणिया-सुणणियां खातर अेक नुंवो टेम-पास अर हांसण रो मुद्दो हुय ज्यावंतो।
मगनै री कुचरणियां रो किण इज कदै बुरो कोनी मान्यो। थोड़ी ताळ पछै कुचरणी भोगण अर कुचरणी करणवाळो अेकमअेक।
गांव रा टाबर-टींगर मगनै री मजाकां अर कुचरणियां पाण उणां नैं 'जोकर` सूं कमती नीं आंकै।
''मगना ताऊ, थारी धोती री लांग मांय चिलम रो खीरो पड़ग्यो-`` छोरा डर` कैवंता तो बापड़ो मगनोचिमक` खड़्यो होवंतो अर लांग झड़कावंतो। टाबर तेतीसा मनाव ज्यांवता।
''मटा, अै टींगर इज कमती नीं। बूढ़ै डैण नैं बैठे सूं खड़्यो करणै मांय के सुवाद आवै.....`` मगनो हंस` रैयज्यांवतो।
गांव रा सगळा मिनखां सागै मगनै रो लगाव। किणी सागै बैर-दुसमणी नीं। हुवै इज किंया। हंसी-मजाक मांयजीवण काटण रो जे धेय हुवै तो उण रो कुण दुसमण? दुसमण तो धिंगाणै आंगळी कर`यां बणै। मेळ-मिलापमांय मगनो अेक लम्बरी।
गांव मांय किणी` रै घरां बटाऊ आयेड़ा हुवो, मगनो त्यार लादै। ''राम-राम सा`` रा ठाडा-ठाडा ठरका अरबातां रै मजाकी पुट रा सबड़का कीं नैं चोखा कोनी लागै ? बटाऊ अर घर वाळो दोनूंवा रो जबरो टेम पास हुज्या।रीसां मांय आयेड़ो जंवाई इज हंस` जावै।
अर कदे इज मगनो कठै नीं पूगै तो ''मगनो जी को दिख्या नीं ?`` बटाऊड़ो आपे ही टै` लगा दै।
मगनो सगळां खातर अेक जरुत बणग्यो। गुवाड़ मांय मगनै बिनां चौपाळ को जमै नीं।
गुवाड़ मांय तास खेलता मोट्यार जद रोदी-रूगंस री लड़ाई लडण लागज्या तो मगनो मजाकां-मजाकां मांयमिन्ट मांय लड़ाई सळटा देवै। गोबर चुगती छो`रयां पोठै खातर धक्का-मुक्की हुज्या तो मगनो भाज` गोबररो न्याव कर` आवै। मगनै रै आंवता इज कीं नै इज आपरै हक री ख्यांत को रैवै नीं, उणां रो सगळो ध्यानमगनै री हंसोड़ बातां मांय हुवै।
बाड़ री राड़ सळटाणूं तो मगनै खातर चुटकी रो खेल। मगनो राड़ मांय बाड़ चालण री कथा बतावै - ''अेक बाड़अेक गांव रै गोरवैं सूं चाली अर दूजै गांव रै गौरवैं कन्नै चाल` आगी। आपरो जद बा बठै हक जमावण लागीतो दूजै गांव री बाड़ कैयो - 'भाण, अबकै-अबकै तो बक्स। म्हारी गळती हुगी, आगै ध्यान राख सूं। म्हारी गळती हुगी कै थनै चालती नैं देख म्हैं इज आगीनै क्यूं कोनी चाली। म्हारो जे चालणू हांेवतो तो म्हारे गांव धणी रैके अड़चाण।` देखो भाईड़ो बाड़ सरकावो जद तो दोनूं सरकावो, चाहे अगूण सरकावो चाहे आथूण। थानै ठा होवैकै आथूणी बाड़ पाड़ोसी रै कैया चालै तो थे थारली अगूणी बाड़ नै अंगूण चालण रो कैव देवो। जगां तो बिती रीबिती रैवै।``
अर राड़ भूल` दोनूं धणी सागी जगां आपरी बाड़ कर लै। के कमती बात? बाड़ री राड़ अर सींव री लड़ाई सैंग सूंठाडी गांव मांय।
भारत-पाक री लड़ाई हुयी जद मगनो मसखरी करतो। कैंवंतो `रै सरकार बावळी है। कदै सींव सरकाणैं खातरपाकिस्तान सूं लड़ै तो कदै सींव मांय पग देवण खातर। आपणै गांव रा जाट सींव सरकाणै मांय माहिर।पाकिस्तान री सींव कन्नैं रा खेत आपरलै जाटां नैं दे देंवता। आयी साल अेक-अेक खूड अेक-अेक हळाईसरकता-सरकता आधै पाकिस्तान री जमीं पर खेती करण लाग ज्यांवता। अर कुण इज सींव मांय पग देद्यै कैबाण थोड़ी है, जेळी री दे-दे मारता। के जरुत बठै फोजां री ? पण सींव सरकाणै रो गुर सरकार जाणै कोनी।
उणां इज दिनां री बात है कै मगनो इस्कूल जावंतै अेक टाबर रो मजाकां-मजाकां मांय जांघीयो खोल दियो।हाऊ दिखावण रै चक्कर मांय। बस सेको मंडग्यो। डांग ऊपर डांग। मगनै रा तोता उडग्या। किण संवेदनशीळमुद्दै नैं छेड़ लियो हो, मगनै रै अफसोस हुयो।
अेकर मगनै बातां मांय चढ़ा` सीतीयै नैं ज्यादा घी प्या दियो। बापड़ै सीतीयै री लांग सगळै दिन लिवाड़ीजीरैयी।
घणूं मजाकी अर कुचरणीगारो मगनो। पण आपरै टाबरां खातर घणूं करड़ो। किणी सागै चांच नीं जोड़नै दै।आपरै गेलै जावो अर गेलौ आवो। टाबरा रो ब्याव हुग्यो, आगली पीढ़ी आगी पण आखै गांव रा मिनख मगनै रैटाबरां रै मुंडै सूं हंसी रा बोल सुण्या कोनी। बोलै तो मधरा-मधरा अर सधीरा। जाणै ताकड़ी सूं तोल` बोलै।सगळा मगनै रो संको करै।
घरां मगनो रैवै इज कमती। आखै बगत गुवाड़ अर कै गांव रै दूजा घरां मांय।
अेकर री बतावै कै जद फूसो बडको अस्सी साल रो हो तो मगनै अेक कोटवाळ भेज` फूसै बड़कै रैरिस्तेदारां मांय फूसै बड़कै री मरणै री चिट्ठी पूगा दी। रिस्तेदार रोंवता-कूकता फूसै बड़कै रै घरां मोकाणआया। आगै जींवतै बैठे फूसै नै दे`खर माथो चक्करीगम हुग्या। सक मगनै माथै गयो। सगळा मगनै रीकुचरणी समझग्या। मगनै नैं पूछ्यो तो मगनो मुळक` कैयो कै जींवतै जी री मोकाण आयां मिनख सौ बरसांरी उमर ले` जावै। अर बात आयी गयी हुगी। पछै फूसो बडको सौ साल सूं बत्ती होय` गयो बतावै। मगनोजबरो ........
पण मगनो इब बिस्यो क्यूं कोनी रैयो ? घणी खोजबीन करी पण ठा कोनी लाग्यो कै मगनै री सदीव रोमजाकीपण अर उण रै चे`ळकै नैं कुण खाग्यो?
कुम्हारां रो मोहनियो तो जरूर कैवो हो कै मगनै नैं अेकर मगनै रै छोरै री बीनणी झेगर दियो हो.......... कांईबात रै पाण ठा कोनी ?