धमीड़


सुरेस रै घणी फुरती। दो दिनां रो काम अेक दिन मांय करणै री सोचै। किणी खेत सूं ईंट थापण खातर माटीथपार मांय गेरै तो माटी रो गाडो टोकाटोक राखै। च्यार गेड़ां मांय अेक गेड़ै रो फायदो कर लै।
थपार मांय इज अंधेरो पड़े ताणी रीजै। दिखण सूं कीं रैयज्या तो बीं रै बस रो सोदौ कोनी रैवै, पण बो हिम्मत नींहारै।
इज कारण कै सगळा जद काम सारू कीं कारू नैं देखै तो उणां री निजर सुरेस माथै जावै। सुरेस दस-बीसरिपिया फालतू लेवो चायै पण काम जबरो करसी। दो ध्याड़ी रो काम अेकल मांय सलटा देसी।
गत रो इज सुरेस सीधो-साधो। सगळां नैं भिया-भिया कर` बोलै। छोटै सै टाबर नैं इज ओछो को बोलै नीं।गाळ ...... गाळ रा ड़ तो सुरेस सीख्या इज कोनी। किणी सूं सुणै तो इज कानां उपरां हाथ देवै।
इसा भला मिनख पड़्या कठै? आज रै बगत मांय तो ढंूढ्या को मिलै नीं। आज आळस तो सगळां मांय पै`लोगुण। अर दूजी गाळ बिनां बोली को पाटै नीं। सगळा आपोआप नैं अकबर समझै। हुकम कुणी इज नीं सुणै, सगळा हुकम देवणूं चावै। सगळां री नीत बणगीं कै पाणी रो लोटो इज कोई दूजो भर` झला देवै तो न्ह्यालहोज्या। ढ़ूंगा इज कोई दूजे धो देवै तो कै बातां?
पण सुरेस। सुरेस तो सुरेस इज है। गांव मांय उदाहरण देयीजै सुरेस रा। करम करणै रै पेटै।
घर मांय अेक जोड़ायत परमेसरी अर दोय छोरी पुनकी अर बालकी। सुरेस गिरस्थी री गाडली आपरै हाडतोड़पसेव रै पाण गुड़कावै। मजूरी रै पाण दो रिपया बणज्यावै। आटोदाळ दो`रो-सो`रो आज्या। कदे-कदे इज कींकाठ-मीठ इज करणी पड़ै। पण परमेसरी चातर। कठै इज दूजै नैं ठा को लागण दे नीं। रिपियै नैं सवा रिपियोकर` बरतै।
सुरेस रो बाप घणूं दारू खोरियो हो। सुरेस रै घणूं याद नीं आवै। उणां री कीं यादां बस। पण जद सुरेस समझणवाळो हुयो तो लैरली सैंग याद सी आयगी। बाप दारू री बोतल मांय पचास बीघा जमीन टिपा दी। सुरेस नैं हाळीरैवण जोगो करग्यो।
खेत-खूड नीं हुवै तो जमीदार क्यां रो ? फगत मजूरीयो जा` लोगां रै रीजणूं इज तो पांती आवै। पण इण नैंसुरेस आप-आपरो भाग मान्यो अर कदे इज पीड़ को दिखायी नीं। जी`सोरै सूं सदीव मेहणत मजूरी करी। काममांय खोट को घाल्यो नीं।
बीसूं साल होग्या हाडगोडा तुड़ावतां पण सुरेस रै घरां पक्को आसरो को घल्यो नीं। नित री जरुतां मांय इजकमती करनी पडै।़ म्हैल मा`ळिया तो धापेड़ां रा हुवै।
घरां परमेसरी अर छोर्यां कदे इज नुवां गाभा को पैर्या नीं। बास-गुवाड़ रा पुराणा उण रा नुवां हुवै। पण जी तोसगळां रो करै।
अेक दिन पुनकी बिचरगी। नुवीं फिराक खातर। बाखळ मांय लेट खावै। नुवीं फिराक लेयस्यूं इज। परमेसरीघणी भुळावै पण मानैं नीं।
पुनकी नैं देख` बालकी इज के कमती रेवै। बाइज नुवैं खातर पोपावै। सेको टाबरा रो। मनावै पण मानै नीं।
आखर मांय परमेसरी बां रै दो-दो धोळ मेल्या जद बुसबुसिया करती थमी। अै है इज मार खावण जोगी।परमेसरी नै झाळ इज आवै पण मन रोवै। बापड़ी छोर्यां रो के दोख ? जीव तो सगळां रो करै। उण रो ओढणियोंइज तो लीर-लीर होग्यो। उणसूं लाज थोड़ी इज ढक सकै। बो आयेड़ा आंसू तो जरूर पूंछ सकै।
परमेसरी नैं देवता बरगो लागै सुरेस। घणूं रीजै बापड़ो पण पार को पड़ै नीं। उण रो के दोख। गिरस्थी रो धरमनिभावणै मांय कीं कसर को छोडै नीं। पण सगळी चीजां री पूग किंया हुवै।
अर अै पुनकी अर बालकी..........
परमेसरी नैं पुनकी अर बालकी रै नाम साथै इज आगै री चिंत हुवण लागी। छोरी रो धन। आपे इज बधै। घणूंबगत नीं काढसी अै, ब्याव-मुकलावण सारू होवंती।
परमेसरी नैं अेक कानीं घर रो टोटो दिखै अर दूजी कानीं पुनकी-बालकी। बीच-बिचाळै बापड़ो पसेव सूंहळाडोब हुयेड़ो सुरेस। किंयां पार पाड़सी ? कठै सूं आवसी ब्याव रा पीसा?
परमेसरी माथो पकड़यो। ना इती तावळ के जरूरी है, पुनकी अर बालकी रै ब्याव री। अेकर सोच्यो तो मनमांय कीं जक पड़ी। पण दूजी छिण उण रै साम्है दूजो दरसाव आग्यो।
बा नंुवीं-नुंवीं जद गांव मांय आयी, गावं रा डाकी किंयां आंख तरेड़ता कानीं। खावण री ज्यूं। बा इज कितीदो`री बंची उण निजरां सूं। अर पुनकी-बालकी कानी बगतसिर के बै निजरां चालसी कोनी ? परमेसरीआकळ-बाकळ हुगी।
कदे इज बापड़ी पुनकी बालकी माथै दया आवै तो कदै इज सुरेस माथै। राम इज लारो को छोड़्यो नीं। दो टींगरदे देवंतो तो के हुवै हो ? कीं रीजाळू हुज्यांवता तो सुरेस रै सागीड़ो सा`रो लागतो। पण..........
बण कीं ओजू सोच्यो अर पुनकी बालकी रा हाथ पकड़` गुवाड़ कानी चाल बहीर हुयी।
कीं ताळ पछै गुवाड़ रै बड़ोड़ै कुंवै मांय घणो तकड़ो धमीड़ माच्यो। गांव रा मिनख कुवै बा`-बा` भेळा हुवणासरू होग्या हा।