दे दड़ादड़


छोरो दड़ाछंट होग्यो। गणेस लैर घणूं इज भाज्यो पण हाथ कोनीं आयो। गुवाड़ ताणीं तो बण लैर्यो कर्यो पणनावड़ीजतो नीं देख` गणेस पाछो आग्यो।
अै टींगर मटा बड़ा चोर कुत्ता हुग्या। कीं री नीं धारै। कुण चोरी सिखावै आनैं? ` पछै चोरी तो बो करै नींजकै नैं कीं मिलै कोनी। आं आगै तो ऊपरथळी रो पड़्यो रैवै। अेक चीज मांगै जद दोय मिलै। पण कागलै नैंगोबर मांय चांच मार्यां बिना सरै थोड़ी इज है।
आवण दे साळै नैं। रींक काढ़द्यूं तो। ईंया करतो-करतो तो खापरियो चोर बणज्यासी। जद सागी बाप री नींधारै तो पछै दूजै री किण री धार सी।
अर गणेस तांगड़पटि्या जचावण लागग्यो। काल ग्वांर री बिजाई सरू करणी है। जुद्ध सारू हथियार तो जचावणाइज पड़ै।
ग्वांर। `रै मटो टींगर ग्वांर री खुंजा भर` नीं भाज्यो हुवै। बात कीं दिमाक मांय आयी।
गणेस फटदांईं खड़्यो होयो अर ग्वांर री भखारी कन्नै गयो। ऊपर सूं देख्यो। ग्वांर सुंवो कर्योड़ो हो पछै अेककानी दरड़ो अर निवाण।
टींगर मटो अधूणसिर नैं देग्यो धार। किता` दिन हुग्या होसी? रोजगो खुंजा भर` ले ज्यांवतो होसी। मटादुकान वाळा इज कमती नीं। टाबरां नैं चोरी करणों सिखावै। बै ग्वार-दाणां लेवण बेई नटज्या तो टींगर क्यांबेईदाणां चोरै। पण बां रो के कांटा मांय हाथ जावै ? पांच रीपिया कीलै री चीज नै दोय मांय लेवै अर आधै कीलै नैंपाव बतावै...... मुफत रो धन भावै।
पण चोरी री बाण है खोटी। अर टींगर मांय पड़गी। सेकसी इज। आज घरां ग्वांर चोर्यो। तड़कै कीं और चोरसीअर परसूं कीं रै दूजां रै घरै हाथ मारसी।
गणेस चिंत करै।
पण अै आपेही किंया सीखै? इण रै साथै रा टींगर इज चोर कुत्ता होसी? देखादेखी तो करै इज।
ना`रै गुण-अवगुण तो संस्कारां रा इज कीं हुवै।
मटी इण रांड दे दिया टाबरां मांय संस्कार। गणेस नैं आपरी लुगाई लिछकी माथै झाळ आयी।
`रै म्हैं देखी जद ही समझग्यो हो कै है तो भली घरां री। आयी नैं बा`रां महीना को हुया नीं अर चीज-बस्तलेय` गिंवारियै नैं चिंणा रो ठाठियो भर` घाल दियो। चीज ली तो पीसा इज दे सकै ही।
बा अेक बात थोड़ी इज है। चाकी रूहायी जद रूहारै नैं दाणां घाल` इज मजूरी चुकायी। नांनू री बहू कन्नै सूंगोबर रो बटोड़ो दड़ायो जद बीं नैं इज तो बाजरी घाली ही। अर सब्जी तो घणी बर इज दाणां री मंगावै।
छोरो देखै इस्सी इज सीखै। दाणां री कीमत बीं नैं दिखै तो बो दाणां रै इज हाथ घालै।
गणेस नैं रीस आवै अर आगै भाजतो छोरो अर कुड़तियै री भरेड़ी खुंजा गणेस नैं दिखै। अर सगळो दोख बोआपरी लुगाई रो मानै।
गणेस बाखळ मांय बैठ्यो तांगड़ रा पाटेड़ा पटिया सीमै। अबैं लुगाई इज आंगणै सूं बाखळ मांय आगी। बा चायरो कोपड़ो गणेस कन्नै ल्या मेल्यो। पण गणेस उण सूं मीट को जोड़ी नीं।
''म्हैं बीज खातर कीं ग्वांर आछो करद्यूं के?`` बण बूझ्यो।
''ग्वांर तो थूं अर छोरो इज आछो करस्यो? जा छोरौ पतियै री दुकान कानीं गयो है ग्वांर री खुंजा भर` बेचणनैं। उण नैं पैली पकड़` ल्याव।`` गणेस हुकम सुणायो।
''छोरै ग्वांर री चोरी करली ?`` बण इचरज सूं बूझ्यो।
''ना छोरै कोनी थारै बाप करली.......`` बो रीसां मांय हो।
बा बात नैं ताड़गी अर पतियै री दुकान कानी बहीर हुगी।
टींगर पतियै री दुकान सूं पैली इज गळी मांय मिलग्यो। बो कीं उगाळी सी काढै हो। मां नै देख` छोरो चिमक्योअर तड़ी देवण री सोची। पण लिछकी घणीं हुस्यार। ठै दांईं छोरै नैं पकड़ लियो। छोरो खंचावै पण बा छोडै थोड़ीइज। ठरड़ती-घींसती छोरै नैं घरां ल्या इज बाड़्यो।
छोरै नैं घरां बड़तां इज बाप दिख्यो। रामलीला रो रावण सो लागै। दस सिरां री जगां दस हाथ दिखै। अर अैसगळा हाथ उणरै पड़सी। छोरै रै दस्त लागग्या।
गणेस लिछकी कन्नै सूं छूटा` टींगर रो बुकियो पकड़्यो। ` दे दड़ादड़। दे दड़ादड़।
छोरै नैं कूट-कूट` मूंज बणा दियो। छोरो घूघावै।
''बता ओजूं चोरी करसी के?`` गणेस हंकरावै।
''लै तो......`` छोरै हामळ कोनी भरी तो गणेस अेक थाप री और मेल दी।
छोरै री नाड़ हाली नटण सारू।
''पतियै री दुकान माथै इज बेच` आयो के ग्वांर......?`` गणेस सगळी बात बूझणूं चावै।
पण छोरो कीं नीं बोल्यो।
गणेस दो-च्यार थाप और घाल्या छोरै रै।
छोरै आखर हामळ भरली।
''के ल्यायो ग्वांर सूं?`` गणेस के लारो छोड़दै छोरै रो।
छोरो ओजूं कीं नीं बोल्यो। गणेस नैं रीस आग्यी। लातां रो भूत बातां सूं कद मानै। दे दड़ादड़। दे दड़ादड़।
मार` आखतो होग्यो गणेस पण छोरो चूं नीं करै।
''`रै ल्यायो के हो..... बता दे, छोड़ देस्यूं।`` गणेस बात उगळवाणी चावै।
पण छोरो के बोलज्या?
गणेस ओजूं लागग्यो, दे दड़ादड़। दे दड़ादड़।
छोरै रो मुंढो सूजग्यो। कठै-कठै सूं लोही झराण इज होग्यो।
छोरै री मां सूं को रैइज्योनीं। बा आगै आयी अर छोरै नै छुटा लियो। ''बता दे बेटा, के ल्यायो?`` लिछकी छोरै नैंभुळावै।
''ईं री तलासी ले..........`` गणेस चोरी रा सगळा खोज काढ़णूं चावै।
लिछकी छोरै री खुंजा टंटोळी।
अेक खुरमलो अर आधो गुलगलो नीसर्यो।
''अै कठै सूं ल्यायो रै?`` गणेस छोरै कानी आंख काढ़ी।
''रसोयी मांय सूं.......... मां जद बीज खातर ग्वांर री बाल्टी भर` भखारी सूं काढै ही जद रसोयी मांय कुण इजकोनी हो........ मां म्हनैं गुलगुला अर खुरमला खावण को दिया नीं............. कैवै ही कै थारी भूआ खातरबणाया है........ म्हैं सूना पड़्या देख, गुलगुला अर खुरमला री खुंजा भर` बारनै भाजग्यो............. थे देखलियो जद म्हैं और जोरगी तड़ी दी..............`` छोरै होळै-होळै सगळी विगत सूं बता दी।
गणेस आपरै हाथां नैं मसळै हो। बो कदै इज आंगणै री कूंट मांय पड़ी ग्वांर री भर्योड़ी बाल्टी कानीं देखै हो अरकदे इज लिछकी रै हाथ मांयलै अेक खुरमलै अर आधै गुलगलै कानीं।